एएमयू में वेदों पर विशेष व्याख्यान का आयोजन

अलीगढ़ 4 जूनः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा कुछ सप्ताह पहले शुरू की गई अपनी विशेष व्याख्यान श्रृंखला के तहत ‘आधुनिक समय में वेदों की प्रासंगिकता’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।
अतिथि वक्ता, संस्कृत, पाली और प्राकृत के प्रख्यात विद्वान, प्रोफेसर सत्य प्रकाश शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, एएमयू और वर्तमान में भारतीय बौद्ध अध्ययन सोसायटी और अध्यक्ष, प्राकृत विकास बोर्ड, एमएचआरडी, भारत सरकार के अध्यक्ष ने वेदों का सार समझाया और उसमें परिकल्पित ‘जियो और जीने दो’ और ‘आपसी सहयोग’ के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कई वैदिक युक्तियों को उद्धृत किया जो सार्वभौमिक भाईचारे, शांति और सद्भाव के साथ आपसी सह-अस्तित्व पर बल देते हैं। उन्होंने मानवता के बेहतर कल के लिए लोगों में प्राचीन ऋषियों के नैतिक मूल्यों को विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कला संकाय के डीन प्रोफेसर आरिफ नजीर ने वेदों की शिक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया जो समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आत्मीयता और आपसी समझ को बढ़ावा देते हैं।
कला संकाय के पूर्व डीन प्रोफेसर कफील अहमद कासमी ने पवित्र कुरान और वेदों की शिक्षाओं का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया।
इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हिमांशु शेखर आचार्य ने व्याख्यान के विषय पर संक्षिप्त चर्चा करते हुए बताया कि वेदों से शुरू होकर संस्कृत साहित्य में धर्म, अर्थ और काम की प्राप्ति में संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है और इन तीनों (त्रिवर्ग) की प्राप्ति में संतुलन की कमी ही सभी प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं का मुख्य कारण है।
पीएचडी स्कॉलर सैकत दास ने कार्यक्रम का संचालन किया और विशाखा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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