रामभक्ति के साथ देश के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने बाने को मजबूत बना रहे PM Modi

नई दिल्ली। प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रामभक्ति में पूरी तरह रम गए हैं। 11 दिवसीय संकल्प में यम-नियम, व्रत का पालन करते हुए उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया है। फर्श पर बिछौना बिछाकर विश्राम कर रहे हैं और दान-पुण्य दिनचर्या में शामिल है। इस सबके बीच देश के विभिन्न हिस्सों में घूम घूम कर विकास कार्यों को अंजाम देने के साथ साथ अलग अलग भाषाओं में रामायण सुनकर यह संदेश देने की कोशिश में भी हैं कि पूरा भारत एक है और श्रेष्ठ है
अयोध्या में 22 जनवरी को होने जा रही श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री मोदी मुख्य यजमान की भूमिका में रहेंगे। इसके लिए उनका 11 दिन का अनुष्ठान चल रहा है। इसके तहत जो भी व्रत-नियम शास्त्रों में उल्लेखित हैं, उनका पालन पीएम मोदी कर रहे हैं। यजमान के रूप में वह व्रत का पालन करते हुए सिर्फ नारियल का पानी पी रहे हैं। फर्श पर कंबल ओढ़कर सो रहे हैं। प्रतिदिन गौ पूजा कर गायों को चारा खिलाते हैं और विभिन्न प्रकार के दान-पुण्य आदि भी कर रहे हैं।
रामभक्ति में पूरी तरह रमे हुए मोदी अपने पद के दायित्वों के निभाने के साथ ही कुछ दिन से देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं। इनमें नासिक स्थित रामकुंड और श्री कालाराम मंदिर, आंध्र प्रदेश में वीरभद्र मंदिर व लेपाक्षी, केरल में गुरुवयूर मंदिर और त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर शामिल है। इसी तरह वह अगले दो दिनों में तमिलनाडु के ऐसे और मंदिरों में दर्शनों के लिए पहुंचेंगे। यह मंदिर न सिर्फ देश को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से एक सूत्र में जोड़ते हैं, बल्कि इनका भगवान राम से भी गहरा संबंध है।