नवग्रह अनाजों और पंचगव्य से होता है निर्माण

अलीगढ़। नवगृह अनाजों और पंचगव्य से बनी गणेश जी की प्रतिमा पर्यावरण का संरक्षण करती है। विसर्जन के उपरांत इससे जलचरों को जीवन मिलता है। गंगा प्रदूषण से मुक्ति के लिए यह सराहनीय कार्य है।

उक्त विचार ईको फ्रेंडली गणपति प्रतिमा विसर्जन कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने व्यक्त किए। स्थानीय जय शंकर धर्मशाला में बाबा बर्फानी भक्त मंडल द्वारा संस्कार भारती और गंगा सेवा समिति के सहयोग से आयोजित निःशुल्क गणपति प्रतिमा वितरण कार्यक्रम में भक्तों को भेंट की गईं।आचार्य सुनील कौशल महाराज ने कहा कि गणेश चतुर्थी से पूर्व मिट्टी, अनाज, पंचगव्य और कैमिकल रहित गणेश जी की मूर्तियों का वितरण कर समाज को अच्छा संदेश दिया जा रहा है। जिसके लिए सभी सहयोगी संस्थाएं बधाई के पात्र हैं।संयोजक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि पीओपी, लोहे की सरिया व तार आदि से बनी मूर्तियों से जहां गंगा प्रदूषित होती ही है, वहीं जलचरों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। गंगा नदी का तल पीओपी से पट जाता है और ऑक्सीजन उत्सर्जन की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। जबकि मिट्टी व अनाज की मूर्ति से जलचरों का पेट भी भरता है और ग्रहदोष भी शांत होते हैं।ज्ञात रहे कि 5 वर्ष पूर्व शिल्पकार छोटेलाल द्वारा बाबा बर्फानी भक्त मंडल के संयोजन में छोटे रूप में ईको फ्रेंडली गणपति मूर्तियों का निर्माण करा, वितरण शुरू कराया गया था। उक्त कार्यक्रम में शिल्पकार छोटेलाल की बेटियों को भी सम्मानित किया गया।इस दौरान विजय गुप्ता साई, डॉ. पंकज धीरज, विवेक गुप्ता, विकास गुप्ता, मनोज पप्पू, संजय बालाजी, नीटू शर्मा, अरूण गुप्ता, निशा, कल्पना, मंजू, पूनम, संजना, खुशबू, उपमा, रश्मि आदि उपस्थित रहे।

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