झारखंड में हेमंत सोरेन के गिरफ्तार होते ही हॉर्स ट्रेडिंग का डर

नई दिल्ली।

 हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद से झारखंड की राजनीति में भूचाल आ रखा है। हेमंत सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह अब चंपई सोरेन राज्य के नए सीएम होंगे। हेमंत की गिरफ्तारी के बाद से उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा में टूट की आशंका जताई जा रही है चंपई सोरेन ने शपथ लेने में देरी के चलते सोरेन परिवार को पार्टी में टूट का डर सता रह है। इसी डर के चलते जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी के विधायकों को तेलंगाना या कर्नाटक में चार्टर्ड विमान से लेजाने की तैयारी की जा रही है

दरअसल, हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब घोड़ों की बिक्री से है और इसकी शुरुआत कैंम्ब्रिज डिक्शनरी से हुई थी। साल 1820 के आसपास घोड़ों की बिक्री के लिए इस शब्द का इस्तेमाल होता था। इस दौरान व्यापारी अच्छी नस्ल के घोड़ों की खरीद फरोक्त करते थे और अच्छे घोड़ों को पाने के लिए चालाकी और प्रलोभन देते थे। इसी से इसका इस्तेमाल राजनीति में भी होने लगा।

राजनीति में कहां से हुई शुरुआत

राजनीति में भी हॉर्स ट्रेडिंग को नेताओं की खरीद फरोक्त को कहा जाता है। दूसरी पार्टियों के नेताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए प्रलोभन दिए जाते हैं। भारतीय राजनीति में इसकी शुरुआत 1967 में हरियाणा चुनाव के बाद हुई। इस दौरान गया लाल नाम के विधायक ने 9 घंटों में 3 बार अपनी पार्टी बदली। इसके बाद आया राम गया राम का जुमला भी काफी हिट हुआ था।

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