डिजिटल होंगे कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, बढ़ेगी ग्रामीण विकास बैंकों की दक्षता

नई दिल्ली।

 केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 225 करोड़ रुपये की लागत से कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों के साथ सहकारी समितियों के पंजीयक के लिए कंप्यूटरीकरण कार्यक्रम प्रारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण से उनकी दक्षता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही में सुधार होगी। साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा

सहकारिता के माध्यम से करोड़ों लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने का मजबूत तंत्र खड़ा किया जा सका है। सहकारिता क्षेत्र डिजिटल दुनिया में जाने के लिए तैयार है। मौके पर केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री बीएल वर्मा भी मौजूद थे।

डिजिटल माध्यम से  भी गांवों तक पहुंचेगी सहकारिता

अमित शाह ने कहा कि डिजिटल माध्यम से सहकारिता भी गांवों तक पहुंचने लगी है। सहकारी समिति के रजिस्ट्रार कार्यालय एवं कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंकों के कंप्यूटराइजेशन के जरिए पैक्सों के साथ पूरी सहकारिता व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे विभिन्न राज्यों की स्थानीय भाषाओं में संवाद हो सकेगा। साथ ही ऋण लेने वाले किसानों के लिए सरल सुविधा की शुरुआत होगी। अमित शाह ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों पर ध्यान नहीं देने के कारण ये अपनी भूमिका अच्छे तरीके से नहीं निभा पाए हैं।

मध्यम और दीर्घकालीन ऋण के लिए यह उपयोगी व्यवस्था है जो आधुनिक खेती की ओर जाने के लिए किसान को पूंजी उपलब्ध कराती है। अगर हम खेती को आधुनिक नहीं बनाएंगे तो न हम उपज बढ़ा पाएंगे और न ही किसानों को समृद्ध कर पाएंगे।

1851 बैंकों की शाखाओं का कंप्यूटराइजेशन

देश के 13 राज्यों के 1851 कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों की शाखाओं का कंप्यूटराइजेशन होने से इनसे जुड़े एक करोड़ 20 लाख किसानों को बहुत फायदा होगा। इन शाखाओं को एक कामन नेशनल साफ्टवेयर के माध्यम से नाबार्ड से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे सभी प्रकार के कृषि ऋण का लिकेज मजबूत हो सकेगा।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के दस वर्ष के दौरान गांव, गरीब और किसानों के लिए दो महत्वपूर्ण काम हुए हैं। देश के करोड़ों गरीबों का जीवनस्तर बेहतर हुआ है। लगभग 23 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आ गए हैं। सहकारिता के जरिए करोड़ों लोगों को स्वरोजगार के साथ जोड़ने का मजबूत तंत्र खड़ा हुआ है। राष्ट्रीय डेटाबेस के माध्यम से राज्यों, तहसील, जिला और ग्रामस्तर पर सहकारिता की जानकारी मिल सकेगी।

विस्तृत विजन के साथ मोदी सरकार के दो कदम-डिजिटल इंडिया और सहकारिता मंत्रालय की स्थापना- समृद्ध गांवों की नींव डालने वाले एवं विकसित भारत के सोच को जमीनी स्तर तक ले जाने वाले साबित होंगे। अमित शाह ने कहा कि पिछले दो वर्षों में केंद्र सरकार ने सहकारिता में डिजिटल इकोसिस्टम बढ़ाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया है। अलग सहकारिता मंत्रालय बनने के तुरंत बाद सबसे पहले 65 हजार पैक्स एवं राज्य सहकारी बैंकों का कंप्यूटराइजेशन किया गया। इसके बाद डेटाबेस बनाया गया। केंद्रीय पंजीयक कार्यालय के सभी काम एक ही साफ्टवेयर से हो सकेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *