पत्रकारों पर झूठे मुकद्दमें और कलम की स्वतंत्रता को दबाने का विरोध करेगा राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ

अलीगढ़,। सरकारी तंत्र सरकार की नीतियों और कार्रवाइयों की आलोचना के लिए पत्रकारों और ऑनलाइन आलोचकों को अधिकाधिक निशाना बनाया जा रहा है।सरकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करना चाहिए और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए मनगढ़ंत या राजनीति से प्रेरित आरोपों में हिरासत में लिए गए तमाम पत्रकारों को रिहा कर देना चाहिए। साथ ही, पत्रकारों को निशाना बनाना और स्वतंत्र मीडिया के मुंह पर ताले लगाना बंद करना चाहिए। उक्त बातें राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र राघव ने राजा महेन्द्र प्रताप पार्क तस्वीर महल पर बैठक को संबोधित करते हुये रूवक्त कीं।उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र द्वारा बड़े पैमाने पर असहमति को कुचलने के साथ-साथ पत्रकारों को निशाना बनाने की कार्रवाई बेखौफ़ होकर धमकाने, हैरान-परेशान करने और दुर्व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
मीडिया की आज़ादी पर ये प्रतिबंध ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार नागरिक समाज पर कार्रवाई तेज कर रही है और वह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, छात्रों, सरकार की आलोचना करने वालों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए राजद्रोह, आतंकवाद-निरोधी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का इस्तेमाल कर रही है। राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिला उपाध्यक्ष अनवर खान ने कहा कि अल्पसंख्यक समूहों के पत्रकारों पर खतरा ज्यादा है।प्रदेश अनुशासन समिति के चेयरमैन मुशीर अहमद खां ने सरकार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करने का आग्रह किया, जिसके तहत आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए गिरफ्तार पत्रकारों को तुरंत रिहा करना, इंटरनेट पर व्यापक और अंधाधुंध पाबंदी समाप्त करना है।पत्रकारों ने कहा, “सरकार को पत्रकारों और आलोचकों को धमकी देने और उन पर हमला करने के आरोपों की त्वरित, गहन, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही इस जांच के दायरे में दोषी सरकारी अधिकारियों को भी लाना चाहिए। पत्रकारों को अपना काम करने के लिए अपनी स्वतंत्रता और जीवन को जोखिम में डालने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए। इस अवसर पर सत्यवीर सिंह यादव,पुष्पेन्द्र सिंह,अहोराम सिंह,फरहत अली खां, मौ.राशिद,विशाल नारायन शर्मा,दीपक कश्यप,मुस्कान सारस्वत, रूपकिशोर राजपूत,मुशीर अहमद,धर्मेन्द्र राघव,नौशाद अब्बासी, गौरव रावत ,मनोज चौहान,राजकुमार िंसह,रॉकी,आलोक िद दर्जनों पत्रकार साशियों ने विचार विमर्श किये।

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